अहसास के मोती जब अश्कों में नहाते हैं,
कुछ नर्म गुनाहों का मंदिर सा बनाते हैं,
नदियाँ हैं सरोवर हैं, बादल हैं, समंदर हैं,
लगता है की हम आसूं बेकार बहाते हैं|
अहसास के मोती जब अश्कों में नहाते हैं,
कुछ नर्म गुनाहों का मंदिर सा बनाते हैं,
नदियाँ हैं सरोवर हैं, बादल हैं, समंदर हैं,
लगता है की हम आसूं बेकार बहाते हैं|
हॅसते -हॅसते जिंदगी ने हमें रूला दिया,होठों पे हॅसी की जगह गम को छुपा लिया,हॅसकर चला गया ,कोई हम पर इस कदर की उम्र भर के लिए हमने हॅसना भुला दिया ।
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