नन्ही सी एक कली

नन्ही सी एक कली

नन्ही सी एक कली थी
अपने पापा के हाथों पली थी
हर गम हर दर्द से अनजान
पापा के सर माथे चढ़ी थी
हँसना खिलखिलाना सिर्फ ये ही तो जीवन था…..
कितने रिश्तों की भीड़ थी
सबके दिलो की डोर थी
दादी की लाडली बुआ कि दुलारी
यहां वहां दौड़ना बस ये ही तो काम था…
पढ़ते लिखते खेलते इठलाते
जवानी में कदम आगया
बहुत कुछ छूटा और बहुत कुछ पा लिया
अभी बस चाहा ही था कि जी भर के जीऊँगी अपनी जिंदगी पर…..
जैसे ही सपनो ने भरी उड़ान थी
अरमान कुछ उड़ने को ही थे
किस्मत को जाने क्या ठानी थी
रुखसत ए विदाई हो गयी
मेरे सपनों की टोकरी मानो जैसे टूट गयी और…… अब हाल ये होगये
हर मंजिल हर खुशी हर हसीं रूठ गयी
अपने पापा की वो
छुईमुई सी कली अब बुझ गयी….

……………..

मेधा शर्मा

 

मै लिख दूगां……..

मै लिख दूगां
तुम पढ़ लेना
मै जज्बातों को कह दूंगा
तुम सुन लेना
प्रेम है या नही मत पूछना
मै तुम्हें नही समझा पाऊंगा
दिल की डोर बंधी है तुम से
उसको नही दिखा पाऊंगा
तुम हो या न हो फिर भी
मन मे छवि तुम्हारी बसाऊंगा
कितना प्रेम है इसका
मोल न लगा पाऊंगा
प्रेम क्या है और क्यों है
इसकी परिभाषा न बता पाऊंगा
मै पास तेरे हूँ या नही
बस दिल से याद कर लेना
मै खुद ही एहसास बनकर चला आऊंगा
अपना समझे या नही
#अंजान समझकर ही
चेहरे पर मुस्कान रख लेना
प्रिये बाकी तुम खुद ही समझ लेना…………

#अंजान…….

अपने अंदर झांकें कौन ?

अपने अंदर झांकें कौन ?
झाँक रहे है इधर उधर सब अपने अंदर झांकें कौन ?
ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां अपने मन में ताके कौन ?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते खुद को आज सुधारे कौन ?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे खुद पर आज विचारे कौन ?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा यह सीधी बात स्वीकारे कौन?
🙏🚩जय श्रीराम🚩🙏

शिव ही सत्य है……

शिव ही सत्य है……

शून्य से भी परे है जो वो शिव है
कल्पना का स्वरुप ही शिव है
जड़ से चेतन हो जाना ही शिव है
ध्यान में मग्न होना ही तो शिव है
क्रोध का पहला स्वरुप ही शिव है
आनंद की अनुभूति होना ही शिव है
जल मे शिव वायु मे शिव धरा मे शिव
इस ब्रह्मांड के कण कण मे शिव है
शिव ही आरंभ शिव ही अंत है
शिव इक खोज है जो अनंत है
शिव ही सत्य है शिव ही अद्वितीय है
शिव इक ध्वनि और उसकी साधना है
शिव कभी न मिटने वाली अजर अमर आत्मा है
शिव ज्ञान है शिव ही तो भगवान है
शिव ही मेरा आराध्य है शिव ही मेरा भाग्य है
शिव ही मंगल शिव ही कल्याण है
शिव ही धर्म शिव ही संस्कृति का भान है
शिव ही तो वेद और पुराण है
शिव ही लौ है शिव ही गंगा का स्नान है
शिव ही बुद्धि शिव ही विवेक शिव ही क्रोध है
शिव ही आधार है बिन शिव न ये संसार है
शिव ही सत्य है बाकि सब मिथ्या है
शिव मे मै मुझमे शिव है शिव वो है जो अमिट है……..

#अंजान……

 

 

 

Happy Mother’s Day

रूह के रिश्तों की यह गहराइयां तो देखिए
चोट लगती है हमें, और चिल्लाती है मां
हम खुशियों में मां को, भले ही भूल जाएं
जब मुसीबत आ जाए तो याद आती है “मां”
Happy Mother’s Day 😘  All of U