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🌷काशिकापुराधिनाथम् भजे🌷
नमामि देवं परमव्ययं तं,
उमापतिं लोकगुरुं नमामि।
नमामि दारिद्रविदारणं तं,
नमामि रोगापहरं नमामि।।

अर्थात- हे परमदेव! अपरिवर्तनीय, और मानव बुद्धि से परे, शिवशम्भु! मैं श्रद्धा और आदर सहित आपको प्रणाम करता हूँ। हे उमापति! जगत के आध्यात्मिक गुरू! आप हम सभी की दरिद्रता, समस्त पापों व रोगों का निवारण करते हैं, मैं आपको सादर नमन् करता हूँ।।

आपको महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं