जो रूट ने टेस्ट क्रिकेट में एक और बड़ा पड़ाव पार कर लिया है। पाकिस्तान के खिलाफ हेडिंग्ले टेस्ट में 66 रन की पारी खेलते हुए रूट ने अपने टेस्ट करियर का 68वां अर्धशतक लगाया और इस मामले में सचिन तेंदुलकर के साथ बराबरी कर ली। खास बात यह है कि रूट ने यह मुकाम अपनी 305वीं टेस्ट पारी में हासिल किया, जबकि सचिन ने 68 अर्धशतक 329 पारियों में बनाए थे।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर एक बार फिर वही पुरानी लेकिन कभी खत्म न होने वाली बहस शुरू हो गई है—क्या जो रूट सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड के सबसे करीब पहुंचने वाले बल्लेबाज हैं?
जवाब है—हां।
लेकिन जब दोनों को एक ही पड़ाव, यानी 305 टेस्ट पारियों पर रखकर देखा जाता है, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है।
305 पारियों के बाद सचिन और रूट में कितना अंतर था?
समान संख्या की पारियों के बाद सचिन के आंकड़े वाकई हैरान करने वाले थे।
| आंकड़ा | सचिन तेंदुलकर | जो रूट |
|---|---|---|
| कुल रन | 15,288 | 14,180 |
| बल्लेबाजी औसत | 56.00 | 50.64 |
| शतक | 51 | 41 |
| अर्धशतक | 64 | 68 |
यानी 305 पारियों के बाद सचिन के खाते में रूट से 1,108 रन ज्यादा थे। सचिन ने उस समय तक 51 शतक लगा दिए थे, जबकि रूट 41 शतकों पर थे।
लेकिन एक आंकड़ा ऐसा है जहां रूट ने सचिन को पकड़ लिया है—अर्धशतक।
और यहीं से इस तुलना में मजा आता है।
68 अर्धशतक सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है
रूट ने पाकिस्तान के खिलाफ 66 रन की पारी खेली। यह कोई शतक नहीं था, कोई दोहरा शतक भी नहीं था। लेकिन उस पारी की अहमियत स्कोरकार्ड से कहीं ज्यादा थी।
यह रूट का 68वां टेस्ट अर्धशतक था।
सचिन के पूरे टेस्ट करियर में भी 68 अर्धशतक हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि सचिन ने यह आंकड़ा 329 पारियों में हासिल किया था, जबकि रूट ने इसे 305 पारियों में छू लिया।
इसका मतलब यह नहीं कि रूट सचिन से बेहतर बल्लेबाज साबित हो गए हैं। लेकिन यह जरूर बताता है कि रूट की consistency को हल्के में लेना बहुत बड़ी गलती होगी।
टेस्ट क्रिकेट में 68 बार पचास या उससे ज्यादा का स्कोर करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है।
लेकिन सचिन के शतकों का आंकड़ा अभी भी बहुत दूर है
यहीं पर तुलना थोड़ा एकतरफा होने लगती है।
सचिन ने अपने टेस्ट करियर में 51 शतक बनाए। रूट के खाते में फिलहाल 41 शतक हैं। यानी रूट को इस मामले में सचिन की बराबरी करने के लिए अभी 10 शतक और चाहिए।
अब 10 शतक सुनने में शायद बहुत बड़ा अंतर न लगे, खासकर तब जब बल्लेबाज खुद अभी खेल रहा हो। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में 10 शतक बनाना इतना आसान नहीं है।
इसके लिए सिर्फ फॉर्म नहीं, फिटनेस, लगातार मौके, टीम की जरूरत और कई सालों तक एक ही स्तर पर बल्लेबाजी—सब कुछ चाहिए।
सचिन ने यही काम दो दशक से ज्यादा समय तक किया था।
रनों में भी सचिन की बढ़त अभी बड़ी है
टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड आज भी सचिन तेंदुलकर के नाम है—15,921 रन।
रूट 14,000 से ज्यादा रन बना चुके हैं और सक्रिय बल्लेबाजों में सचिन के रिकॉर्ड के सबसे करीब दिखाई देते हैं। हेडिंग्ले में 66 रन की पारी के बाद उनके कुल रन 14,180 हो गए।
इसका मतलब है कि सचिन के रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए रूट को अभी 1,741 रन और बनाने होंगे।
यह दूरी बड़ी है, लेकिन असंभव नहीं।
यही वजह है कि क्रिकेट की दुनिया में रूट को सचिन के रन रिकॉर्ड का सबसे गंभीर आधुनिक चुनौतीकर्ता माना जा रहा है।
सचिन की असली ताकत सिर्फ रन नहीं थे
सचिन की महानता को सिर्फ 15,921 रन और 51 शतकों से समझना थोड़ा मुश्किल है।
उन्होंने अलग-अलग दौर की क्रिकेट देखी। अलग-अलग तरह के गेंदबाजों का सामना किया। तेज गेंदबाजों के दौर से लेकर स्पिन के कठिन दौर तक, उन्होंने अपनी बल्लेबाजी को लगातार बदला।
और सबसे बड़ी बात—उनके ऊपर उम्मीदों का जो दबाव था, वह भी सामान्य नहीं था।
भारत में सचिन जब बल्लेबाजी करने उतरते थे, तो करोड़ों लोग टीवी के सामने बैठ जाते थे। उनका विकेट गिरना कई बार पूरे देश का मूड बदल देता था।
रूट के ऊपर भी दबाव है, लेकिन सचिन वाला सामाजिक और क्रिकेटीय दबाव अपने आप में एक अलग कहानी थी।
फिर भी रूट को कम आंकना सबसे बड़ी भूल होगी
यहां सचिन के प्रति सम्मान दिखाने के चक्कर में रूट की उपलब्धियों को छोटा करना ठीक नहीं होगा।
रूट ने ऐसे समय में टेस्ट क्रिकेट में रन बनाए हैं जब क्रिकेट का शेड्यूल बेहद व्यस्त है। उन्होंने इंग्लैंड के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में रन बनाए हैं और अपने करियर के लंबे हिस्से में टीम की बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली है।
उनका सबसे बड़ा हथियार शायद यही है—वह लगातार रन बनाते रहते हैं।
कभी शतक, कभी 150, कभी 70-80 रन की महत्वपूर्ण पारी।
और यही कारण है कि वह आज टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े सक्रिय बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।
तो क्या रूट सचिन का रिकॉर्ड तोड़ देंगे?
यही सवाल अब सबसे ज्यादा पूछा जाएगा।
संभावना जरूर है, लेकिन अभी दावा करना जल्दबाजी होगी।
रूट को सचिन से आगे निकलने के लिए 1,741 रन और चाहिए। अगर वह अपनी मौजूदा निरंतरता बनाए रखते हैं और पर्याप्त टेस्ट खेलते हैं, तो यह रिकॉर्ड खतरे में आ सकता है।
लेकिन सचिन का रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। वह 200 टेस्ट और 329 पारियों में जमा हुआ एक पूरा युग है।
रूट के पास इतिहास बदलने का मौका जरूर है।
लेकिन फिलहाल कहानी इतनी ही है कि रूट सचिन के दरवाजे तक पहुंच चुके हैं, घर के अंदर अभी नहीं गए हैं।
और क्रिकेट की खूबसूरती यही है—रिकॉर्ड किताब में लिखा होता है, लेकिन उसे तोड़ने की कहानी मैदान पर बनती है।
अब नजर सिर्फ रूट के अगले शतक पर नहीं होगी।
नजर इस बात पर होगी कि क्या वह आने वाले वर्षों में सचिन तेंदुलकर के 15,921 टेस्ट रनों के उस पहाड़ को सच में पार कर पाते हैं, जिसे क्रिकेट की दुनिया पिछले कई सालों से लगभग अछूता मानती आई है।
