मिलना इत्तेफाक था, बिछड़ना नसीब था,
उतना ही दूर हो गया वो जितना करीब था,
मैं उस दोस्त को ढूढ़ता ही रह गया,
जिसकी हथेली पर लिखा मेरा नसीब था|
मिलना इत्तेफाक था, बिछड़ना नसीब था,
उतना ही दूर हो गया वो जितना करीब था,
मैं उस दोस्त को ढूढ़ता ही रह गया,
जिसकी हथेली पर लिखा मेरा नसीब था|
जिन्दगी नहीं हमें तुमसे प्यारी,
तुम पर हाजिर है जान हमारी,
आखों में हमारे आसूं हैं तो क्या हुआ,
जान से भी प्यारी है मुस्कान तुम्हारी|
तेरी जुल्फों के साये में सो जायेंगे,
वहीँ से तेरे लबों का रंग चुरायेंगे,
तेरे आस पास तो रह न सके जानेमन,
सोचा की तेरे दिल में हो आशियाँ बनायेंगे|
समुन्द्र की गहराई से ज्यादा था उनसे प्यार,
खुदा की खुदाई से ज्यादा था उनपे ऐतबार,
एक रोज जो किया हमने, हमारे इश्क का इजहार,
न जाने क्यों था उनके लबों पे इंकार|
दिल में बसा कर क्या करूंगा तुमको ,
मैं तुम्हें खुद में संमा लूंगा ।
चलो कहीं , ठहरो कहीं , नदी बन कर ,
मैं सागर की तरह तुमको खुद में मिला लूंगा ।।
दुनियावी प्यार में क्या रख्खा है ,
मैं तुम्हें सूफियाना इश्क का मजा दूंगा ।
बेरोकटोक जिंदगी हो अपनी शर्तों पर ,
मैं तुम्हें हर बुरी नजर से बचा लूंगा ।।
बोल दे जितना जरूरी हो चुप रहकर ,
मैं आंखों ही आंखों में सब उगलवा लूंगा ।
जीत जाएगा तेरा और मेरा जीवन ,
जब तेरी रूह को मैं अपनी रूह में समा लूंगा ।।
“Ideas are like stars; you will not succeed in touching them with your hands. But, like the seafaring man on the desert of waters, you choose them as your guides, and following them you will reach your destiny.”
‐ Carl Shurtz, (1829-1906), Writer and Politician
“सितारों की तरह होते हैं आदर्श; उन्हें आप हाथों से छू नहीं पाएंगे। लेकिन, समुद्र के नाविकों की तरह, आप उन्हें अपना मार्गदर्शक चुनते हैं, और उनका पीछा करते हुए आप अपनी मंजिल पा लेंगें।”
‐ कार्ल शुर्ट्ज़ (१८२९-१९०६), लेखक एवं राजनीतिज्ञ
आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते,
पर अपनी आदतें तो बदल सकते हैं,
और बदली हुई आदतें आपका भविष्य बदल देंगीं

“The man who insists on seeing with perfect clarity before he decides, never decides.”
‐ Henri Frederic Amiel (1821-1881), Swiss poet and philosopher
“सब कुछ स्पष्ट होने पर ही निर्णय लेने का आग्रह जो पालता है, वह कभी निर्णय नहीं ले पाता।”
‐ हेनरी फ़्रेडरिक आम्येल (१८२१-१८८१), स्विस कवि एवं दार्शनिक
सितम को हमने बेरुखी समझा,
प्यार को हमने बंदगी समझा,
तुम चाहे मुझे जो समझो,
हमने तो तुम्हें अपनी जिन्दगी समझा|

🚩 🚩जय श्री हनुमान जी 🚩🚩
आया जन्म दिन राम भक्त हनुमान का,🚩
अंजनी के लाल का, पवन पुत्र हनुमान का ,
बोलो सब मिलकर जयकारा हनुमान की ,🚩
सबको बधाई हो जन्म दिन हनुमान की🚩

सुना था कभी किसी से ,
ये मोहब्बत की दुनिया है ,
हमने भी दिल लगा के देखा तो ये जाना ,
मतलब की दुनिया है और ,ये तो जालिमों से भरा है !!