उसको बिना देखे उसकी तस्वीर बना सकता हूँ,
उसको बिना छुए उसका हाल बता सकता हूँ,
मेरी मोहब्बत में इतना दम है कि
अपने आँखों के आंसूं उसकी आँखों से बहा सकता हूँ|
उसको बिना देखे उसकी तस्वीर बना सकता हूँ,
उसको बिना छुए उसका हाल बता सकता हूँ,
मेरी मोहब्बत में इतना दम है कि
अपने आँखों के आंसूं उसकी आँखों से बहा सकता हूँ|
उसकी गलियों में घूमते घूमते कुत्तों से दोस्ती हो गयी
वो तो नहीं मिली पर हम कुत्तों के सरदार हो गये
मिलना इत्तेफाक था, बिछड़ना नसीब था,
उतना ही दूर हो गया वो जितना करीब था,
मैं उस दोस्त को ढूढ़ता ही रह गया,
जिसकी हथेली पर लिखा मेरा नसीब था|
दिल में बसा कर क्या करूंगा तुमको ,
मैं तुम्हें खुद में संमा लूंगा ।
चलो कहीं , ठहरो कहीं , नदी बन कर ,
मैं सागर की तरह तुमको खुद में मिला लूंगा ।।
दुनियावी प्यार में क्या रख्खा है ,
मैं तुम्हें सूफियाना इश्क का मजा दूंगा ।
बेरोकटोक जिंदगी हो अपनी शर्तों पर ,
मैं तुम्हें हर बुरी नजर से बचा लूंगा ।।
बोल दे जितना जरूरी हो चुप रहकर ,
मैं आंखों ही आंखों में सब उगलवा लूंगा ।
जीत जाएगा तेरा और मेरा जीवन ,
जब तेरी रूह को मैं अपनी रूह में समा लूंगा ।।
“It is not the man who has too little, but the man who craves more, that is poor.”
‐ Lucius Annaeus Seneca, Roman Philosopher
“वह व्यक्ति ग़रीब नहीं है जिसके पास थोड़ा बहुत ही है। ग़रीब तो वह है जो ज़्यादा के लिए मरा जा रहा है।”
‐ सैनेका, रोमन दार्शनिक
शाम ढली फिर काली रात आयी,
दिल धड़का फिर तेरी याद आयी,
दिल ने महसूस किया उन हवाओं को,
जो तुम्हें छूकर मेरे पास आयी|
कितनी जल्दी मुलाकात गुजर जाती है,
बुझती नहीं प्यास और बरसात गुजर जाती है,
यादों से कहो इस तरह आया न करें,
आती नहीं नींद और रात गुजर जाती है|
गलती उसी से होती है,
जो मेहनत से काम करता है,
निक्कामों की जिन्दगी तो दूसरों,
की बुरे खोजने में ख़त्म हो जाती है!!

आखों से करती हो बात, होंठों से क्यों नहीं,
डर है तुम्हें ज़माने का, या मुझ पे यकीं नहीं.
करता हूँ जब तुमसे फरियाद
तो तुम मुझे खुदगर्ज समझ लेती हो,
जब ढूढोगी तुम गैरों में कोई अपना
तो तुम्हें मेरा ही चेहरा नजर आएगा