मेरे प्यार का ये शहर – *मेधा शर्मा*

हर आस मचल जाती है जहाँ हर सपना साकार सा लगता है
इसलिए ए दोस्त मेरे,वो सफ़र सुहाना होता है

खुशियों के मोती मिलते है,धड़कन को सुर मिल जाते हैं
सब कुछ मन चाहा होता है,हर गम जो छुप जाते हैं

ख्वाबों में तेरा आना ये मेरे बस की बात नही
ये तो प्रीत की डोर है दिल की,देखे कोई और बात नही

देख अभी भी तो कैसे ये दिल मेरा एक तेरे इंतज़ार से रौशन है
तू ना आना चाहे फिर ये कैसे हो जाता गुमसुम है

हर ओर शनाइयां बज उठती,दिल ये शोर भी करता है
मेरे सूने सपने को एक,तेरा आना ही रंग भर सकता है

कहीं कमी तो छोडी मैंने जो हक़ीक़त को ना भेद सकी
वर्ना मेरा एक इशारा ही,पास तुझे ला सकता है

एक बार तू छोड़ दे अहं को आके मेरे पास बैठ
देख के मेरी तड़प से,मन तेरा भर सकता है

देना बाँहों का घेरा मुझको न न चाहे बोले कुछ
तुम चुप चाप से अपने होंठ,मेरे होठों पे रख देना..

मेरे प्यार का ये शहर है जो तेरे दिल में है बसता है….
इसीलिए ए दोस्त मेरे ,वो सफ़र सुहाना होता है….!!

*मेधा शर्मा*

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