सिंदूरी शाम, महकी हुयी तन्हाई है,
मुद्दतों बाद तेरी यद् चली आई है,
ऐसे में तू आ जाये, दिल को करार आ जाये,
सुरमई रत फिर से जवान हो जाये|
सिंदूरी शाम, महकी हुयी तन्हाई है,
मुद्दतों बाद तेरी यद् चली आई है,
ऐसे में तू आ जाये, दिल को करार आ जाये,
सुरमई रत फिर से जवान हो जाये|
इक मुट्ठी बीज बिखेर दो,
दिलों की जमीन पर…
बारिश का मौसम है,
शायद मोहब्बत पनप जाए.!!
तुम्हारी मेरी भी इक कहानी बनी थी ।
कुछ इस तरह से मेरी जिन्दगानी बनी थी ॥
जमाने की नज़रों मे आ गई थी तेरी अदाएं ।
उम्र के जिस पडाव पर तुम सयानी बनी थी ॥
खासमखास थे मेरे लिए, वो चंद लम्हे ।
जिस घडी तुम मेरी दीवानी बनी थी ॥
खुदा जाने क्या टूट गया था तेरे मेरे बीच ।
तेरी बेवफ़ाई मेरे प्यार की निशानी बनी थी ॥
हमारा फ़साना शहर में मशहूर हुआ कुछ ऐसा ।
कि मेरी दीवानगी लोगो की जुबानी बनी थी ॥