Author: ANMOL SMS

  • भारत की महान नारियाँ – भाग 4

    डॉ. ऐनी बेसेंट

    ‘भारत की संताने ही यदि हिन्दुत्व की रक्षा नहीं करेंगी, तो कौन आयेगा उसे बचाने ? हिन्दुत्व के बिना भारत क्या है एक निष्प्राण शरीर! भारत को बचाने के लिये हिन्दुत्व को बचाया जाना जरुरी है। अच्छी तरह समझ लीजिये, भारत और हिन्दुत्व एक ही हैं। बिना हिन्दुत्व के भारत का कोई भविष्य नहीं है। स्वाधीनता आंदोलन के दिनों में यह चिंतन भारत तथा विश्व के सामने रखने वाली महान् विचारिका तथा स्वतंत्रता सेनानी श्रीमती ऐनी बेसेन्ट थीं।

    ऐनी बेसेंट का जन्म 1 अक्टूबर 1847 को लंदन में हुआ ऐनी बेसेंट जर्मन, फ्रेंच, अंग्रेजी, हिन्दी और संस्कृत- इतनी सारी भाषाओं की ज्ञाता एक आयरिश महिला थी जो शिकागों में स्वामी विवेकानन्द से मिलकर इतनी प्रभावित हुई कि भारत आयी और यहीं अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया वे अपने भाषणों में संस्कृत श्लोकों का धाराप्रवाह पाठ करती थी। वे भारतीय जीवन दर्शन से एकाकार हो गई थी।

    भारतीय जीवन दर्शन के प्रति आकर्षण के फलस्वरूप सन् 1894 में उनका भारत आगमन हुआ। भारत आने के उपरान्त 1906 ई. तक का अधिकांश समय बनारस में बीता और भारतीयों को अपनी महान् विरासत के प्रति सचेत करने के लिये उन्होंने 1898 ई. में बनारस में सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की। सन् 1916 में पं. मदनमोहन मालवीय ने इसी कॉलेज को हिन्दू विश्वविद्यालय का नाम और स्वरूप दिया। डॉ. एनी बेसेंट के जीवन का मूल मंत्र था- कर्म। उन्होंने समाज के सर्वांगीण विकास के लिये नारी के अधिकारों को महत्वपूर्ण बताया। (more…)

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  • भारत की महान नारियाँ – भाग 3

    रानी दुर्गावती

    दुर्गावती का जन्म लगभग चार सौ वर्ष पूर्व कालिंगर के राजा कीर्तिराय की एकमात्र सन्तान के तौर पर हुआ। बाल्यकाल से ही दुर्गावती पुरुषों से भी बढ़चढ़ कर कुशलता और प्रवीणता से शस्त्र संचालन और घुड़सवारी करती थी। गढ़ मण्डला के राजा दलपति शाह ने जब एक बार दुर्गावती को अभ्यास करते हुए देखा तो प्रभावित होकर तुरन्त ही उस वीरांगना को अपनी अर्धागिनी बनाने का निश्चय कर लिया। दलपतशह से विवाह कर दुर्गावती गढ़ मण्डला की राजरानी बनी।

    वर्ष भर बाद ही उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई राजा और राज्य दोनों ही खुशी झूम उठे। रानी पारिवारिक जीवन का एक वर्ष का ही सुख प्राप्त कर पाई थी से कि वज्रपात हुआ। राजा दलपत शाह की मृत्यु हो गई। राजपरिवार के लोग राजा की चिता सजाने के साथ-साथ रानी को भी उनके साथ जलाने का प्रबन्ध करने लगे। परन्तु रानी ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा- “मुझे तो पति के साथ आग में जल जाना उनके सौंपे उत्तरदायित्वों से भागने जैसा ही लगता है। मैं एक ही मार्ग देखती हूँ उनके पदचिह्नों पर चलते हुए उत्तरदायित्वों को निभाने का।”

    इसके बाद रानी ने अपना अगला कदम अपनी सम्पूर्ण प्रतिभा एवं दक्षता के साथ शासन व्यवस्था की सूत्रधार के रूप में उठाया। अब हर किसी को सुविधापूर्वक रानी से मिलने और अपने दुख-दर्द समस्याएँ कहने का मौका मिलने लगा। इस कारण जनता रानी को अपने प्राणों से भी अधिक चाहने लगी। (more…)

  • Love Quotes For Valentine’s Day वेलेंटाइन डे पर अपने पार्टनर को भेजें ये लवली शायरी

    Love Quotes For Valentine’s Day

    Valentines Day Messages for your lovely Partner.   वेलेंटाइन डे पर अपने पार्टनर को भेजें ये लवली शायरी

    मेरा भी अपना वजूद है, मैं इतनी बेजान तो नहीं, आप फुर्सत में याद करते है मुझे,

    मैं इतनी बेकार तो नहीं, हर बार अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाऊ,

    मैं इतनी फिजूल तो नहीं, हमेशा आप से प्यार मांगती रहूँ,

    मैं इतनी लाचार तो नहीं, आप मुझे हमेशा रुलाते आए, हमारी आंखे इतनी मजबूत तो नहीं


    आज सोचा – कुछ कम लिखूँ,
    ना मैं – ना तुम ,आज हम लिखूँ.!

    ना कोई ख़ुशी – ना ग़म लिखूँ
    वो जो थोड़ा सा तेरे मन में – थोड़ा मेरे मन में है,
    आज वो वाला हम लिखूँ..!!

    ख़्वाहिशें बहुत है – दबी किसी कोने में,
    सोचा – आज लिखूँ तो बस तुम्हें कुछ कहने का मन लिखूँ…!!!


    अंदाज बदलने लगते है होठों पे शरारत होती है, नजरों से पत्ता चल जाता है,जिस दिन मोहब्बत होती है ।


    Aap ruthhe ruthhe se lagte hai, koi tarkib bataye manane ki, Hum zindgi girvi rakh dege, Aap kimat bataye muskurane ki🌹


    मुस्कुरा कर मिला करो हमसे,
    कुछ कहा और सुना करो हमसे..

    बात करने से बात बढ़ती है,
    रोज़ बातें किया करो हमसे..💕💕


    kya chahe rab se, tumhe pane ke baad, kisaka kare intizaar, Tere aane ke baad,

    kyo mohbbat me jaan loota dete hai Log, Maine bhi ye jana ishq karne ke baad.


  • भारत की महान नारियाँ – भाग 2

    विदुषी उभय भारती

    मिथिला क्षेत्र अपने सांस्कृतिक ज्ञान के विभिन्न रूपों के लिये प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध था। मिथिला में एक से एक पंडित दूर-दूर से आते थे। वहाँ कई कई दिन तक चलने वाले शास्त्रार्थ में जीवन जगत से सम्बन्धित विषय पर वाद विवाद होता था। विजयी पंडितों को विशेष सम्मान मिलता था। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य मिथिला के महापंडित मंडन मिश्र के ज्ञान की ख्याति सुनकर उनके गाँव जा पहुँचे। वहाँ कुएं पर पानी भर रही महिलाएं संस्कृत में वार्तालाप कर रही थी, आचार्य शंकर के शिष्य ने उनसे पूछा- ‘मंडन मिश्र का घर कहाँ है?’ एक स्त्री ने बताया जिस दरवाजे पर तोते शास्त्रार्थ कर रहे हों, वही मंडन मिश्र का घर होगा।’ एक द्वार पर सचमुच तोते शास्त्रार्थ कर थे। वहीं मंडन मिश्र का घर था। शंकराचार्य ने शिष्यों सहित पं. मंडन मिश्र के घर प्रवेश किया। मंडन और उनकी पत्नी उभय भारती ने उनका स्वागत-सत्कार किया। आस पड़ोस के पंडित भी आ पहुँचे। शंकराचार्य ने मंडन मिश्र से कहा कि वे विषाद रूप भिक्षा लेने के लिये उनके पास आए हैं। मण्डन मिश्र ने स्वीकार किया और दोनों के बीच शास्त्रार्थ के लिये समय निर्धारित किया गया।

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  • भारत की महान नारियाँ – भाग 1

    सती अनुसूइया

    मातु पिता भ्राता हितकारी मितुप्रद सब सुनु राजकुमारी॥ अमित दानि भर्ता बयदेही। अधम सो नारि जो सेव न तेही

    वनवास के समय जब राम, लक्ष्मण और सीता जी सहित महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे तो वहाँ उनकी पत्नी अनुसूइया जी ने सीताजी को यही सुमंत्र दिया कि माता, पिता, भाई सभी हितकरने वाले होते हैं परन्तु वह सुख सीमित है। असीम सुख तो पति ही देने वाला है। उन्होंने बताया- वैदेही! बहुत विचार करने पर भी मैं पति से बढ़कर कोई हितकारी बन्धु नहीं देखती तपस्या के अविनाशी फल की भांति वह इस लोक और परलोक में सर्वत्र सुख प्रदान करने वाला है।

    माता सीता को पतिव्रता धर्म की शिक्षा देने वाली सती अनुसूईया का भारतवर्ष की सती साध्वी नारियों में अग्रणी स्थान है। मनु की पुत्री देवहति और ब्रह्मर्षि कर्दम की पुत्री के रूप में जिस पुत्री ने जन्म लिया उसका नाम रखा गया अनसूया अनुसूइया अर्थात जिसके मन में किसी के प्रति असूय (ईर्ष्या) भाव न हो। ब्रह्मा जी के मानस पुत्र परम तपस्वी महर्षि अत्रि उन्हें पति रूप में प्राप्त हुए। अपनी सतत सेवा व पावन प्रेम से इन्होंने पति हृदय को जीत लिया था। पतिव्रता और तपस्विनी होने के साथ-साथ नारी जाति के परम कल्याण का साधन पति सेवा को ही मानती थी। अपने पातिव्रत्य धर्म के कारण सती कहलाने वाली अनुसूइया के संदर्भ में एक पौराणिक कथा प्रचलित है।

    एक बार विचरण करते हुए नारद जी ने त्रिदेवियों- लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती को सती और पतिव्रता पत्नी अनुसूइया की प्रशंसा करते हुए बताया कि उनके समान पवित्र और पतिव्रता तीनों लोकों में नहीं है। त्रिदेवियों ने उसे अपना अपमान समझा और अपने-अपने पतियों त्रिदेवों से हठ कर उन्हें अनुसूइया के सतीत्व की परीक्षा लेने के लिये बाध्य कर दिया। ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देव मुनि वेश में महर्षि अत्रि की अनुपस्थिति में उनके आश्रम पर पहुँचे। अतिथि रूप में तीनों मुनियों को आते देखकर पतिव्रता अनुसूइया ने उनका स्वागत सत्कार किया। किन्तु मुनियों ने देवी के आतिथ्य को अस्वीकार करते हुए कहा (more…)

  • करूँ वंदन हे शिव नंदन तेरे चरणों की धूल है चन्दन

    करूँ वंदन हे शिव नंदन तेरे चरणों की धूल है चन्दन

    [et_pb_section fb_built=”1″ _builder_version=”3.22″ collapsed=”off”][et_pb_row admin_label=”Row” _builder_version=”3.25″ background_size=”initial” background_position=”top_left” background_repeat=”repeat” collapsed=”off”][et_pb_column type=”4_4″ _builder_version=”3.25″ custom_padding=”|||” custom_padding__hover=”|||”][et_pb_text admin_label=”Text” _builder_version=”4.7.3″ background_size=”initial” background_position=”top_left” background_repeat=”repeat”]

    करूँ वंदन हे शिव नंदन,
    तेरे चरणों की धूल है चन्दन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।।

    विघ्न अमंगल तेरी कृपा से,
    मिटते है गजराज जी,
    विश्व विनायक बुद्धि विधाता,
    श्री गणपति गजराज जी,
    जब भी मन से करूँ अभिनन्दन,
    अंतर मन हो जाए पावन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।

    करूं वंदन हें शिव नंदन,
    तेरे चरणों की धूल है चन्दन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।।

    रिद्धि सिद्धि के संग तिहारो,
    सोहे मूस सवारी,
    शुभ और लाभ के संग पधारो,
    भक्तन के हितकारी,
    काटो क्लेश कलह के बंधन,
    हे लम्बोदर हे जग वंदन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।

    करूं वंदन हें शिव नंदन,
    तेरे चरणों की धूल है चन्दन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।।

    देवो में है प्रथम पूज्य,
    हे एकदंत शुभकारी,
    वंदन करे ‘देवेंद्र’ उमासूत,
    पर जाऊँ बलिहारी,
    करता ‘कुलदीप’ महिमा मंडन,
    ‘बादल’ विघ्नेश्वर का सुमिरण,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।।

    करूं वंदन हें शिव नंदन,
    तेरे चरणों की धूल है चन्दन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।।

    करूँ वंदन हे शिव नंदन,
    तेरे चरणों की धूल है चन्दन,
    तेरी जय हो गजानन जी,
    जय जय हो गजानन जी।।

     

    [/et_pb_text][/et_pb_column][/et_pb_row][et_pb_row column_structure=”1_3,1_3,1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_column type=”1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_code _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][/et_pb_code][/et_pb_column][et_pb_column type=”1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_code _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][/et_pb_code][/et_pb_column][et_pb_column type=”1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_code _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][/et_pb_code][/et_pb_column][/et_pb_row][et_pb_row column_structure=”1_3,1_3,1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_column type=”1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_code _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][/et_pb_code][/et_pb_column][et_pb_column type=”1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_code _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][/et_pb_code][/et_pb_column][et_pb_column type=”1_3″ _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][et_pb_code _builder_version=”4.7.3″ _module_preset=”default”][/et_pb_code][/et_pb_column][/et_pb_row][/et_pb_section]

  • राष्ट्रनायकों के प्रेरक विचार

    “जिसको न निज-गौरव तथा निज-देश का अभिमान है। वह नर नहीं, नर पशु निरा है, और मृतक समान है” – मैथिलीशरण गुप्त

    देशभक्ति मानव-मात्र का धर्म है। इसके बिना मानव पशु के समान होता है। देशभक्ति मनुष्य के रक्त में होती है। तभी तो रक्त की अन्तिम बूँद एवं अपनी अन्तिम श्वास तक देशभक्त देश के लिए जीवित रहता है –

    क्या आप जानते हैं कि ये वाक्य किस-किस देशभक्त ने कहे हैं?

    1. “सवा लाख से एक लड़ाऊँ” –  गुरु गोविन्द सिंह

    2 “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” – लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

    3. न्यायाधीश के पूछने पर किसने कहा, “मेरा नाम ‘आज़ाद’, मेरे पिता का नाम ‘स्वतंत्र’और मेरा निवास स्थान भारतमाता के चरणों में है’ – चन्द्रशेखर आजाद

    4. “अंग्रेजों भारत छोड़ो” – महात्मा गाँधी

    5. “मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी” – रानी लक्ष्मीबाई

    6. ” अपना राज्य बुरा होने पर भी विदेशी राज्य से सौ गुना अच्छा है” – महर्षि दयानन्द सरस्वती

    7. ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है” – रामप्रसाद बिस्मिल

    8. दो आजन्म कारावास का दण्ड सुनाए जाने पर किस महापुरुष ने यह वाक्य कहा “अंग्रेजों! तुम्हारा राज्य पचास वर्ष नहीं रहेगा” – वीर विनायक दामोदर सावरकर

    9. “भारत हिन्दू राष्ट्र है” – डॉ० केशव बलिराम हेडगेवार

    10. कर्म, ज्ञान और भक्ति इन तीनों का जिस जगह ऐक्य होता है, वही श्रेष्ठ पुरुषार्थ है  – श्री अरविन्द

    11. शिक्षा का अर्थ है उस पूर्णता को व्यक्त करना जो मनुष्यों में पहले से विद्यमान है  – स्वामी विवेकानंद

    12. स्वदेश और स्वजाति की उन्नति के मंगल मंदिर का सिंहद्वार है- ‘मातृभाषा’ – लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ

  • हमारे राष्ट्रीय नायक

    मोरोपंत पिंगळे

    मोरेश्वर तथा मोरोपंत नीळकंठ पिंगळे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अग्रणी नेता थे, उन्हें मराठी में ‘हिन्दू जागरणाचा सरसेनानी (हिन्दू जनजागरण का सेनापति) की उपाधि से विभूषित किया जाता है। आपका जन्म सन 1919 के 30 दिसंबर को मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुआ। वे 1930 में संघ स्वयंसेवक बने और डॉ. हेडगेवारजी का सान्निध्य उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने नागपुर के मॉरिस कॉलेज से बी.ए. तक की शिक्षा पूर्ण करके 1941 में प्रचारक जीवन की शुरुआत की और विभाग से लेकर अखिल भारतीय स्तर पर हर तरह की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

    श्री मोरोपंतजी ने बहुत सारे कार्यों को हाथ में लेकर पूर्णता तक पहुंचाया, परन्तु कुछ ऐसे विशेष कार्य है जिनका उल्लेख आवश्यक है।

    छत्रपति शिवाजी महाराज की 300वीं पुण्यतिथि के अवसर पर महाराष्ट्र में रायगढ़ पर भव्य कार्यक्रम की योजना बनाई। आन्ध्र प्रदेश स्थित परमपूज्य डॉ. हेडगेवारजी के पैतृक गांव कन्दुकुर्ती में उनके परिवार के कुलदेवता के मंदिर को उन्होंने भव्य रूप दिया। नागपुर में स्मृतिमंदिर के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। किला पारडी (गुजरात) के पंडित सातवळेकरजी के स्वाध्याय मंडल के कार्य की पुनर्रचना उन्होंने की।

    विश्व हिन्दू परिषद् के स्थापना में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा तथा उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद के बीच समन्वयक की महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। महाराष्ट्र में वनवासी क्षेत्र में अलग अलग प्रकल्प जैसे ‘ठाणेका देवबांध प्रकल्प’, ‘कळवा स्थित कुष्ठरोग निर्मूलन प्रकल्प’ का प्रारंभ किया। महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र में स्वयंसेवकों द्वारा संचालित बैंक की स्थापना में मोरोपंत का बड़ा योगदान रहा। व्यावसायिक क्षेत्र में लघु उद्योग भारती की स्थापना उन्होंने की। (more…)

  • बादाम तेल के फायदे

    बादाम तेल के फायदे

    बादाम तेल के इस्तेमाल के कई लाभ हैं।

    बादाम तेल का इस्तेमाल आप सेहत के लिए भी कर सकती हैं और खूबसूरती के लिए भी। बादाम की तरह इसका तेल भी पोषक तत्व और खनिजों से युक्त होता है। बादाम तेल का सेवन एक ओर जहां दिल की सेहत के लिए अच्छा है वहीं यह दिमागी सेहत के लिए भी फायदेमंद माना गया है। बादाम शरीर रोग प्रतिरोधी प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है।

    बादाम तेल के फायदे निम्नलिखित हैं :

    बालों को बनाएं मजबूत

    बादाम के तेल में वे पोषक तत्व होते हैं जो बालों के लिए लाभकारी हैं | बादाम तेल के नियमित इस्तेमाल से बाल मजबूत और चमकदार बन सकते हैं | अगर आपको लंबे बाल पसंद है तो इसे लगाने से आपके बालों को मजबूती मिलेगी | यह स्कैल्प से जुड़ी समस्याओं में भी फायदेमंद हो सकता है | अगर आप बाल गिरने की समस्या से परेशान हैं तो इसमें भी बादाम का तेल आपकी मदद करेगा | यह बालों का पोषण भी करता है। (more…)