बहुत खुबसूरत है हंसी तुम्हारी,
लेकिन तुम मुस्कुराती ही कम हो |
सोचता हूँ देखता रहूँ तुमको
लेकिन तुम नजर आती ही कम हो|
बहुत खुबसूरत है हंसी तुम्हारी,
लेकिन तुम मुस्कुराती ही कम हो |
सोचता हूँ देखता रहूँ तुमको
लेकिन तुम नजर आती ही कम हो|
कुछ जख्म ऐसे मिले की फूलों पे सोया ना गया,
दिल जल कर राख हुआ और आखों से रोया ना गया|
वक्त की धूप में झुलसे अरमां मेरे,
चाहत की एक धीमी सी फुहार आ जाये,
मेरी जिन्दगी में गर तुम आ जाओ,
तो पतझड़ में जैसे बहार आ जाये|
बरसात आये और जमीं गीली न हो,
धूप निकले और सरसों पीली न हो|
ऐ मेरे यार, कैसे सोच लिया तूने,
तेरी याद आये और आँख गीली न हो|
हर सुबह की धुधं याद दिलाती है,
हर फूल की खुशबू जादू जगाती है|
चाहो न चाहो कितना भी,
पर सुबह सुबह आपकी याद आती है|
जिन्दगी इस कदर हैरान है,
छोटी छोटी बातों से दिल परेशान है,
दूर बहुत है मंजिल, दिखती नहीं रह है,
फिर भी खुशकिस्मत हैं हम, साथ हमारे आप हैं|
लोग फूलों से प्यार करते हैं,
हम काँटों से प्यार करते हैं,
हम उनसे प्यार करते हैं,
जो हमसे प्यार करते हैं |
साल दर साल यूँ ही गुजर जायेंगे,
रिश्तों के मायने शायद बदल जायेंगे,
पर यकीन रखना अपनी दोस्ती पे,
बस आँखें बंद करना हम नजर आयेंगे
इश्क के समंदर में डूबा नहीं करते,
ग़मों के प्याले को पिया नहीं करते,
वो तो हमें तुम जैसा दोस्त मिला,
वरना हम किसी से दोस्ती किया नहीं करते