फरेब था हसीं में, आशिकी समझ बैठे,
मौत को ही अपनी जिन्दगी समझ बैठे,
वक्त का मजाक था या बदनसीबी हमारी|
फरेब था हसीं में, आशिकी समझ बैठे,
मौत को ही अपनी जिन्दगी समझ बैठे,
वक्त का मजाक था या बदनसीबी हमारी|
समझा दो अपनी यादों को,
बिन बुलाये पास आया करती हैं|
आप तो दूर होके सताती हो,
लेकिन वो पास आकर रुलाती है|
दोस्ती इश्क से कम नहीं होती,
ना हो इश्क तो जिन्दगी ख़त्म नहीं होती|
साथ अगर हो जिन्दगी में दोस्तों का तो,
जिन्दगी जन्नत से कम नहीं होती|
हसीं ने लबों पर थिरकना छोड़ दिया,
ख्वाबों ने नींद में आना छोड़ दिया|
नहीं आती अब तो हिचकियाँ भी,
लगता है अपनों ने याद करना छोड़ दिया|
ज़िन्दगी इम्तिहान लेती है
लोगों की जान लेती है
दिल्लगी इम्तिहान लेती है
दिलजलों की जान लेती है
दोस्ती इम्तिहान लेती है
दोस्तों की जान लेती है
दिल की गली से बचके गुजरना
ये सोच लेना फिर प्यार करना
आशिकी इम्तिहान लेती है
आशिकों की जान लेती है
तुम्हीं से मैंने दिल लगाया, तुम्हें न एक पल भुलाया,
मेरे जख्मों की नुमाइश हो रही है,
तुम्हें पाने की कोशिश हो रही है|
नाविक निराश हो तो साहिल जरुरी है,
नजरें तलाश में हो तो इशारा जरूरी है|
मरने के लिए तो कोई कहीं मर सकता है,
मगर जीने के लिए सहारा जरुरी है|
कच्चे धागों से बनी पक्की डोर है राखी
प्यार और मीठी शरारतों की होड़ है राखी,
भाई की लम्बी उम्र की दुआ है राखी
बहन के प्यार का पवित्र धुँआ है राखी,
भाई से बहन की रक्षा का वादा है राखी
लोहे से भी मजबूत एक धागा है राखी,
जांत-पांत और भेदभाव से दूर है राखी
एकता का पाठ पढाती नूर है राखी,
बचपन की यादों का चित्रहार है राखी
हर घर में खुशियों का उपहार है राखी,
रिश्तों के मीठेपन का अहसास है राखी
भाई-बहन का परस्पर विश्वास है राखी।